श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 158
 
 
श्लोक  1.15.158 
“হেন বরে কন্যা নাহি পারিলাঙ দিতে
আপনার ভাগ্য নাহি, হৈবে কে-মতে?”
“हेन वरे कन्या नाहि पारिलाङ दिते
आपनार भाग्य नाहि, हैबे के-मते?”
 
 
अनुवाद
"हम लोग बहुत दुर्भाग्यशाली हैं, तो फिर हम अपनी बेटियों की शादी ऐसे लड़के से कैसे कर सकते हैं?"
 
"We are very unfortunate, so how can we marry our daughters to such a boy?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)