श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  1.15.151 
সে মহা-কৌতুক দেখি’ শিষুর কি দায
জ্ঞানবান্ সবে লজ্জা ছাডি’ নাচি’ যায
से महा-कौतुक देखि’ शिषुर कि दाय
ज्ञानवान् सबे लज्जा छाडि’ नाचि’ याय
 
 
अनुवाद
बच्चों की तो बात ही क्या, विद्वान पंडित भी अपनी हिचक छोड़कर नाचने लगे।
 
Forget about the children, even the learned pundits left their hesitation and started dancing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)