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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह
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श्लोक 12
श्लोक
1.15.12
’তিলক না থাকে যদি বিপ্রের কপালে
সে কপাল শ্মশান-সদৃশ’—বেদে বলে
’तिलक ना थाके यदि विप्रेर कपाले
से कपाल श्मशान-सदृश’—वेदे बले
अनुवाद
“वेद कहते हैं कि यदि ब्राह्मण के माथे पर तिलक नहीं है, तो वह श्मशान के समान है।
“The Vedas say that if a Brahmin does not have a tilak on his forehead, he is like a crematorium.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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