বেদ-গোপ্য এ-সকল না কহিবে কা’রে
কহিলে পাইবে দুঃখ জন্ম-জন্মান্তরে”
वेद-गोप्य ए-सकल ना कहिबे का’रे
कहिले पाइबे दुःख जन्म-जन्मान्तरे”
अनुवाद
"ये बातें किसी को मत बताना, क्योंकि ये जानकारी वेदों के लिए भी गोपनीय है। अगर तुमने ऐसा किया तो जन्म-जन्मान्तर तक दुःखी रहोगे।"
"Do not tell these things to anyone, because this information is confidential even to the Vedas. If you do so, you will remain unhappy for many lives."
तात्पर्य
वेद-गोप्य शब्द इस बात को इंगित करता है कि वेदों के गोपनीय रहस्य साधारण लोगों पर कभी प्रकट नहीं होते, बल्कि ये गोपनीय रहस्य केवल उसी के हृदय में प्रकट होते हैं जो अवरोही प्रक्रिया का वास्तविक अनुयायी है, या जो एक आचार्य का अनुसरण करता है। जो भी विषय ज्ञान के अपने कमजोर संसाधनों की सहायता से भोगियों और वैरागियों द्वारा समझा जाता है, वे केवल वेदों के बाहरी अर्थ हैं। ऐसे विषय वेदों के उन वास्तविक अनुयायियों का उद्देश्य नहीं होते हैं, जो वास्तविक ज्ञान को विकसित करने की शरण में हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥