श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.14.10 
নবদ্বীপে যা’রা যত ধর্ম-কর্ম করে
ভোজ্য-বস্ত্র অবশ্য পাঠায প্রভু-ঘরে
नवद्वीपे या’रा यत धर्म-कर्म करे
भोज्य-वस्त्र अवश्य पाठाय प्रभु-घरे
 
 
अनुवाद
जब भी नवद्वीप का कोई निवासी कोई भी पवित्र कार्य करता था, तो वह सबसे पहले भगवान के घर कुछ खाद्य सामग्री और वस्त्र अवश्य भेजता था।
 
Whenever any resident of Navadvipa performed any sacred work, he would first send some food items and clothes to the house of the Lord.
तात्पर्य
उस समय हिन्दू समुदाय में श्रेष्ठ गुरुजन का आदर और सम्मान करने का रिवाज़ जोरों से था इसीलिए सब लोग राजधानी पहुँच कर विद्वानों के शिरोमणि निमाई पण्डित जी को भेंट स्वरूप चावल वस्त्र आदि वस्तुएँ देकर दान किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)