এই-মত প্রহর-খানেক দিগ্বিজযী
অদ্ভুত সে পডযে, তথাপি অন্ত নাই
एइ-मत प्रहर-खानेक दिग्विजयी
अद्भुत से पडये, तथापि अन्त नाइ
अनुवाद
दिग्विजयी ने इस अद्भुत तरीके से तीन घंटे तक लगातार पाठ किया।
Digvijayi recited in this amazing manner continuously for three hours.
तात्पर्य
दिग्विजयी द्वारा रचे गये तथा पढ़े गये प्रार्थनाओं में अपूर्व और चुने हुए शब्दों का प्रयोग तथा सुन्दर उपमायें थीं। इसलिये शास्त्रों में निपुण विद्वानों को भी उन पदों पर विचार करने और उनके स्वाद लेने में बहुत कठिनाई होती थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥