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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना
»
श्लोक 81
श्लोक
1.13.81
কত মেঘ, শুনি, যেন করযে গর্জন
এই-মত কবিত্বের গাম্ভীর্য-পঠন
कत मेघ, शुनि, येन करये गर्जन
एइ-मत कवित्वेर गाम्भीर्य-पठन
अनुवाद
दिग्विजयी का पाठ बादलों की गड़गड़ाहट के समान था।
Digvijayi's recitation was like the thunder of clouds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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