श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.13.8 
প্রভু যত নিরবধি আক্ষেপ করেন
পরম্পরা, সাক্ষাতেহ সবেই শুনেন
प्रभु यत निरवधि आक्षेप करेन
परम्परा, साक्षातेह सबेइ शुनेन
 
 
अनुवाद
भगवान ने इन विद्वानों को लगातार फटकार लगाई, जिन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ये ताने सुनने पड़े।
 
The Lord constantly rebuked these scholars, who had to face these taunts directly or indirectly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)