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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना
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श्लोक 57
श्लोक
1.13.57
দুঃখ না পাইবে বিপ্র, গর্ব হৈবে ক্ষয
বিরলে সে করিবাঙ দিগ্বিযযী জয
दुःख ना पाइबे विप्र, गर्व हैबे क्षय
विरले से करिबाङ दिग्विययी जय
अनुवाद
“इसलिए मैं उसे एकांत स्थान में पराजित करूँगा, जिससे उसका घमंड नष्ट हो जाएगा, परन्तु उसे कोई हानि नहीं होगी।”
“So I will defeat him in a secluded place, so that his pride will be destroyed, but he will not suffer any harm.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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