श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  1.13.52 
ধর্ম-কথা, শাস্ত্র-কথা অশেষ কৌতুকে
গঙ্গা-তীরে বসিযা আছেন প্রভু সুখে
धर्म-कथा, शास्त्र-कथा अशेष कौतुके
गङ्गा-तीरे वसिया आछेन प्रभु सुखे
 
 
अनुवाद
भगवान प्रसन्नतापूर्वक गंगा तट पर वर्णाश्रम-धर्म तथा शास्त्रीय विषयों पर चर्चा करने लगे।
 
The Lord happily started discussing Varnashrama Dharma and scriptural subjects on the banks of the Ganga.
तात्पर्य
धर्म-कथा शब्द साधारण *वर्णाश्रम* विषयों को दर्शाता है, जो इन्द्रियों के द्वारा ग्राह्य होते हैं।

इस संसार में आध्यात्मिक ज्ञान का अभाव है, इसलिये जीवों के अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए प्रज्ञात्मक ज्ञान के विशयों को देने को शास्त्र-कथा कहा जाता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)