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श्लोक 1.13.42  |
শুনি’ শিষ্য-গণের বচন গৌরমণি
হাসিযা কহিতে লাগিলেন তত্ত্ব-বাণী |
शुनि’ शिष्य-गणेर वचन गौरमणि
हासिया कहिते लागिलेन तत्त्व-वाणी |
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| अनुवाद |
| अपने शिष्यों की बातें सुनकर रत्न-सदृश गौरांग मुस्कुराये और भगवान के स्वरूप का वर्णन करने लगे। |
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| Hearing the words of his disciples, the gem-like Gauranga smiled and began to describe the form of the Lord. |
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