श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.13.35 
সরস্বতী বক্তা যাঙ্’র জিহ্বায আপনে
মনুষ্যে কি বাদে কভু পারে তা’ন সনে?
सरस्वती वक्ता याङ्’र जिह्वाय आपने
मनुष्ये कि वादे कभु पारे ता’न सने?
 
 
अनुवाद
“चूँकि सरस्वती उसकी जिह्वा पर निवास करती हैं, अतः मनुष्य उनसे वाद-विवाद कैसे कर सकता है?”
 
“Since Saraswati resides on his tongue, how can a man argue with her?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)