श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना  »  श्लोक 208
 
 
श्लोक  1.13.208 
বিদ্যা-রস গৌরাঙ্গের অতি-মনোহর
ইহা যেই শুনে, হয তাঙ্’র অনুচর
विद्या-रस गौराङ्गेर अति-मनोहर
इहा येइ शुने, हय ताङ्’र अनुचर
 
 
अनुवाद
जो कोई भी भगवान गौरांग की मनमोहक विद्यामय लीलाओं को सुनेगा, वह अवश्य ही उनका दास बन जायेगा।
 
Whoever listens to the captivating, learned pastimes of Lord Gauranga will surely become His servant.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)