রাজ্যাদি সুখের কথা, সে থাকুক দূরে
মোক্ষ-সুখো ’অল্প’ মানে কৃষ্ণ-অনুচরে
राज्यादि सुखेर कथा, से थाकुक दूरे
मोक्ष-सुखो ’अल्प’ माने कृष्ण-अनुचरे
अनुवाद
राजसी ऐश्वर्य से प्राप्त सुख की बात तो दूर, कृष्ण के भक्त मोक्ष से प्राप्त सुख को भी तुच्छ समझते हैं।
Forget about the happiness derived from royal opulence, Krishna's devotees even consider the happiness derived from salvation as worthless.
तात्पर्य
जब परम भगवान की सेवा की अभिरुचि शुद्ध भक्तों के हृदयों में जगाई जाती है, तो वे मानते हैं कि मानव जीवन के चार लक्ष्य- धर्म, आर्थिक विकास, इंद्रियतृप्ति और मुक्ति- केवल धोखा, छल या कपट हैं। इस संबंध में आठवें अध्याय के 79वें छंद में आदि-खण्ड के तात्पर्य को देखें।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥