श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना  »  श्लोक 178-179
 
 
श्लोक  1.13.178-179 
সেই সে বিদ্যার ফল জানিহ নিশ্চয
’কৃষ্ণ-পাদ-পদ্মে যদি চিত্ত-বিত্ত রয’
মহা-উপদেশ এই কহিলুঙ্ তোমারে
’সবে বিষ্ণু-ভক্তি সত্য অনন্ত-সṁসারে’
सेइ से विद्यार फल जानिह निश्चय
’कृष्ण-पाद-पद्मे यदि चित्त-वित्त रय’
महा-उपदेश एइ कहिलुङ् तोमारे
’सबे विष्णु-भक्ति सत्य अनन्त-सꣳसारे’
 
 
अनुवाद
"निःसंदेह जानो कि ज्ञान का लक्ष्य कृष्ण के चरणकमलों में मन को स्थिर करना है। मैं तुम्हें यही सर्वोत्तम उपदेश दे सकता हूँ कि समस्त लोकों में भगवान विष्णु की भक्ति ही एकमात्र वास्तविक सत्य है।"
 
"Know beyond doubt that the goal of knowledge is to fix the mind on the lotus feet of Krishna. This is the best advice I can give you: devotion to Lord Vishnu is the only real truth in all the worlds."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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