vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना
»
श्लोक 153
श्लोक
1.13.153
প্রভু বোলে,—“দিগ্বিজযী হৈযা আপনে
তবে তুমি আমারে এ-মত কর’ কেনে?”
प्रभु बोले,—“दिग्विजयी हैया आपने
तबे तुमि आमारे ए-मत कर’ केने?”
अनुवाद
प्रभु ने कहा, "तुम तो विद्या के महारथी हो। तुम मेरे साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हो?"
The Lord said, "You are a master of knowledge. Why are you treating me like this?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×