श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.13.15 
তথাপিহ হেন তা’ন মাযার বডাই
বুঝিবারে পারে তা’নে,—হেন জন নাই
तथापिह हेन ता’न मायार बडाइ
बुझिबारे पारे ता’ने,—हेन जन नाइ
 
 
अनुवाद
फिर भी मायावी शक्ति का प्रभाव ऐसा था कि कोई भी उन्हें पहचान नहीं पाया।
 
Yet the effect of the magical power was such that no one could recognize him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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