श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  1.13.124 
অবশ্য ইহার আজি বুঝিব কারণ”
এত বলি’ মন্ত্র-জপে বসিলা ব্রাহ্মণ
अवश्य इहार आजि बुझिब कारण”
एत बलि’ मन्त्र-जपे वसिला ब्राह्मण
 
 
अनुवाद
“मुझे अपनी हार का कारण अवश्य जानना चाहिए।” ऐसा सोचकर ब्राह्मण ने अपना मंत्र जपना शुरू कर दिया।
 
“I must know the reason for my defeat.” Thinking this, the Brahmin began chanting his mantra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)