श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  1.13.104 
তাহারা পাযেন মোহ, যাঙ্’র বিদ্যমানে
অতএব পাছে সে থাকেন সর্ব-ক্ষণে
ताहारा पायेन मोह, याङ्’र विद्यमाने
अतएव पाछे से थाकेन सर्व-क्षणे
 
 
अनुवाद
फिर भी वह प्रभु की उपस्थिति में भी हतप्रभ रहती है, और इसलिए वह हमेशा उनके पीछे खड़ी रहती है।
 
Yet she remains bewildered even in the presence of the Lord, and so she always stands behind Him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)