श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  1.13.100 
কোন্ চিত্র-তাহান সম্মোহ প্রভু-স্থানে?
বেদে ও পাযেন মোহ যাঙ্’র বিদ্যমানে
कोन् चित्र-ताहान सम्मोह प्रभु-स्थाने?
वेदे ओ पायेन मोह याङ्’र विद्यमाने
 
 
अनुवाद
यह कोई असामान्य बात नहीं है कि दिग्विजयी भगवान के समक्ष मोहग्रस्त हो गयीं, क्योंकि भगवान की उपस्थिति में वेद भी मोहग्रस्त हो जाते हैं।
 
It is not unusual that Digvijayi became bewildered before the Lord, because even the Vedas become bewildered in the presence of the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)