श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 12: भगवान का नवद्वीप में भ्रमण  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  1.12.74 
আপন-ইচ্ছায প্রভু নানা কর্ম করে
সে কেমনে সুস্থ হৈবেক প্রতিকারে
आपन-इच्छाय प्रभु नाना कर्म करे
से केमने सुस्थ हैबेक प्रतिकारे
 
 
अनुवाद
भगवान् अपनी ही मधुर इच्छा से अनेक लीलाएँ करते हैं। उन्हें किसी बाह्य उपचार से कैसे ठीक किया जा सकता है?
 
The Lord performs many pastimes by His own sweet will. How can He be cured by any external remedy?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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