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श्लोक 1.12.65  |
গোষ্ঠী-সহ মুকুন্দ-সঞ্জয ভাগ্যবান্
ভাসযে আনন্দে, মর্ম না জানযে তা’ন |
गोष्ठी-सह मुकुन्द-सञ्जय भाग्यवान्
भासये आनन्दे, मर्म ना जानये ता’न |
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| अनुवाद |
| यद्यपि वे भगवान के स्पष्टीकरण को समझ नहीं सके, फिर भी भाग्यशाली मुकुन्द संजय और उनका परिवार परमानंद की लहरों में तैर रहे थे। |
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| Although they could not understand the Lord's explanation, the fortunate Mukunda Sanjaya and his family were floating in waves of ecstasy. |
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