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श्लोक 1.12.60  |
দিবস্-একো যা’রে প্রভু করেন সম্ভাষ
বন্দি-প্রায হয যেন, পরে’ প্রেম-ফাঙ্স |
दिवस्-एको या’रे प्रभु करेन सम्भाष
बन्दि-प्राय हय येन, परे’ प्रेम-फाङ्स |
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| अनुवाद |
| यदि प्रभु किसी से एक बार बात कर लेते तो वह व्यक्ति प्रेम की डोर से बंध जाता था। |
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| If the Lord spoke to someone once, that person would be bound by the bond of love. |
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