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श्लोक 1.12.43  |
“হেন কর কৃষ্ণ—জগন্নাথের নন্দন
তো’র রসে মত্ত হৌ, ছাডি’ অন্য-মন |
“हेन कर कृष्ण—जगन्नाथेर नन्दन
तो’र रसे मत्त हौ, छाडि’ अन्य-मन |
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| अनुवाद |
| हे कृष्ण, कृपया जगन्नाथ मिश्र के पुत्र को बिना विचलित हुए आप में लीन होने दें। |
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| O Krishna, please allow Jagannatha Mishra's son to merge into You without being disturbed. |
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