श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 12: भगवान का नवद्वीप में भ्रमण  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.12.43 
“হেন কর কৃষ্ণ—জগন্নাথের নন্দন
তো’র রসে মত্ত হৌ, ছাডি’ অন্য-মন
“हेन कर कृष्ण—जगन्नाथेर नन्दन
तो’र रसे मत्त हौ, छाडि’ अन्य-मन
 
 
अनुवाद
हे कृष्ण, कृपया जगन्नाथ मिश्र के पुत्र को बिना विचलित हुए आप में लीन होने दें।
 
O Krishna, please allow Jagannatha Mishra's son to merge into You without being disturbed.
तात्पर्य
नवद्वीप के वैष्णवों ने भगवान कृष्ण से प्रार्थना आरंभ की, "हे जगन्नाथ मिश्र के पुत्र, निम्‍आई पंडित सभी अन्य प्रयासों को त्याग दें और कृष्ण की पूजा में संपूर्ण रूप से तल्‍लीन हो जाएं। निम्‍आई पंडित कृष्ण की भक्ति सेवा में विलक्षण प्रयासों को भी प्रकट करें जैसे कि उनके उन्‍नत विद्वता ने उन्‍हें संसार में सर्वोच्‍च स्‍थान दिलाया है"।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)