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श्लोक 1.12.262  |
এ প্রভু জাগিলে চিত্তে, সর্ব-বন্ধ-ক্ষয
পরম-নির্মল সুপ্রসন্ন চিত্ত হয |
ए प्रभु जागिले चित्ते, सर्व-बन्ध-क्षय
परम-निर्मल सुप्रसन्न चित्त हय |
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| अनुवाद |
| किन्तु जब यह भगवान किसी के हृदय में प्रकट होते हैं, तो उसके सारे भौतिक बंधन नष्ट हो जाते हैं और उसका हृदय शुद्ध एवं प्रसन्न हो जाता है। |
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| But when this Lord appears in one's heart, all his material bonds are destroyed and his heart becomes pure and happy. |
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