| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 12: भगवान का नवद्वीप में भ्रमण » श्लोक 25 |
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| | | | श्लोक 1.12.25  | নানা-রূপে দোষে’ প্রভু সরস্বতী-পতি
হেন নাহি তার্কিক, যে করিবেক স্থিতি | नाना-रूपे दोषे’ प्रभु सरस्वती-पति
हेन नाहि तार्किक, ये करिबेक स्थिति | | | | | | अनुवाद | | तब भगवान् ने, जो देवी सरस्वती के पति हैं, उनके कथन में अनेक त्रुटियाँ बताईं। ऐसा कोई नहीं था जो उनके तर्क को नकार सके और उन्हें चुप करा सके। | | | | Then the Lord, the husband of the goddess Saraswati, pointed out the many flaws in her statement. There was no one who could refute her argument and silence her. | | ✨ ai-generated | | |
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