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श्लोक 1.12.245  |
ললাটে তিলক-ঊর্দ্ধ্ব, পুস্তক শ্রী-করে
দৃষ্টি-মাত্রে পদ্ম-নেত্রে সর্ব-পাপ হরে’ |
ललाटे तिलक-ऊर्द्ध्व, पुस्तक श्री-करे
दृष्टि-मात्रे पद्म-नेत्रे सर्व-पाप हरे’ |
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| अनुवाद |
| उनके माथे पर तिलक लगा हुआ था और हाथों में कुछ पुस्तकें थीं। उनके कमल-नेत्रों की एक झलक से सारे पाप नष्ट हो जाते थे। |
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| He had a tilak on his forehead and held some books in his hands. A single glance of his lotus eyes could destroy all sins. |
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