श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 12: भगवान का नवद्वीप में भ्रमण  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.12.24 
গদাধর বোলে,—“আত্যন্তিক দুঃখ-নাশ
ইহারেই শাস্ত্রে কহে মুক্তির প্রকাশ”
गदाधर बोले,—“आत्यन्तिक दुःख-नाश
इहारेइ शास्त्रे कहे मुक्तिर प्रकाश”
 
 
अनुवाद
तब गदाधर बोले, "दुःख से मुक्ति ही मोक्ष है। शास्त्रों के अनुसार मोक्ष का यही अर्थ है।"
 
Then Gadadhara said, "Freedom from suffering is salvation. This is the meaning of salvation according to the scriptures."
तात्पर्य
श्री गदाधर ने कहा, "साख्य-शास्त्रों जैसे विभिन्न शास्त्रों में यह कहा गया है कि अत्यधिक संकट से मुक्ति मुक्ति का लक्षण है।" सांख्य-प्रवचन-सूत्रों (1.1) में कहा गया है: अथ त्रिविध-दुःखात्यंत निवृतिरत्यंत पुरुषार्थः - "तीन प्रकार के दुखों का निवारण जीवन का लक्ष्य है।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)