| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 12: भगवान का नवद्वीप में भ्रमण » श्लोक 183 |
|
| | | | श्लोक 1.12.183  | প্রভু বোলে,—“শ্রীধর, তুমি যে অনুক্ষণ
’হরি হরি’ বোল, তবে দুঃখ কি কারণ? | प्रभु बोले,—“श्रीधर, तुमि ये अनुक्षण
’हरि हरि’ बोल, तबे दुःख कि कारण? | | | | | | अनुवाद | | भगवान ने कहा, “श्रीधर, तुम सदैव हरि का नाम जपते हो, फिर तुम सदैव दरिद्रता से क्यों पीड़ित रहते हो? | | | | The Lord said, “Shridhar, you always chant the name of Hari, then why do you always suffer from poverty? | | ✨ ai-generated | | |
|
|