श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 12: भगवान का नवद्वीप में भ्रमण  »  श्लोक 146
 
 
श्लोक  1.12.146 
তবে গৌর গেলা শঙ্খ-বণিকের ঘরে
দেখি’ শঙ্খ-বণিক্ সম্ভ্রমে নমস্করে
तबे गौर गेला शङ्ख-वणिकेर घरे
देखि’ शङ्ख-वणिक् सम्भ्रमे नमस्करे
 
 
अनुवाद
इसके बाद गौरा एक शंख व्यापारी के घर गयी, जिसने भगवान का उचित सम्मान किया।
 
After this Gaura went to the house of a conch shell merchant, who paid due respect to the Lord.
तात्पर्य
शंख-वाणिक शब्द को आम बोल-चाल की भाषा में शांखारी के नाम से जाना जाता है, जो कौड़ी से बनी वस्तुओं को बेचता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)