श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 11: श्री ईश्वर पुरी से मिलन  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  1.11.87 
অতি অনির্বচনীয ঠাকুর সুন্দর
সর্ব-মতে সর্ব-বিলক্ষণ-গুণ-ধর
अति अनिर्वचनीय ठाकुर सुन्दर
सर्व-मते सर्व-विलक्षण-गुण-धर
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर का व्यक्तिगत सौन्दर्य अवर्णनीय था। वे समस्त असाधारण गुणों के भण्डार थे।
 
Vishvambhara's personal beauty was indescribable. He was a repository of all extraordinary qualities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)