श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 11: श्री ईश्वर पुरी से मिलन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  1.11.51 
এই-মত রঙ্গ করে বিশ্বম্ভর-রায
কে তা’নে জানিতে পারে, যদি না জানায?
एइ-मत रङ्ग करे विश्वम्भर-राय
के ता’ने जानिते पारे, यदि ना जानाय?
 
 
अनुवाद
भगवान विश्वम्भर की इन लीलाओं को कौन समझ सकता है जब तक कि वे स्वयं उन्हें प्रकट न करें?
 
Who can understand these pastimes of Lord Visvambhara unless He Himself reveals them?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)