श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 11: श्री ईश्वर पुरी से मिलन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.11.30 
মুকুন্দ পণ্ডিত বড, প্রভুর প্রভাবে
পক্ষ-প্রতিপক্ষ করি’ প্রভু-সনে লাগে
मुकुन्द पण्डित बड, प्रभुर प्रभावे
पक्ष-प्रतिपक्ष करि’ प्रभु-सने लागे
 
 
अनुवाद
भगवान की कृपा से मुकुंद बहुत विद्वान थे। इसलिए वे निमाई की चुनौती का तर्क और प्रतितर्क प्रस्तुत करने में समर्थ थे।
 
By the grace of God, Mukunda was very learned, and therefore he was able to present arguments and counter-arguments to Nimai's challenge.
तात्पर्य
भगवान् की दया से मुकुन्द के ज्ञान की कोई सीमा नहीं थी। मुकुन्द ने अपने वाद-विवाद और प्रतिवाद के द्वारा भगवान् से शास्त्रार्थ किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)