श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 11: श्री ईश्वर पुरी से मिलन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.11.18 
চতুর্-দিক্ হৈতে লোক নবদ্বীপে যায
নবদ্বীপে পডিলে সে বিদ্যা-রস পায
चतुर्-दिक् हैते लोक नवद्वीपे याय
नवद्वीपे पडिले से विद्या-रस पाय
 
 
अनुवाद
पूरे भारत से लोग नवद्वीप में अध्ययन करने के लिए आते थे, क्योंकि जो व्यक्ति नवद्वीप में अध्ययन करता था, उसे शिक्षा का स्वाद मिलता था।
 
People from all over India came to study in Navadvipa, because whoever studied in Navadvipa got the taste of education.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)