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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 11: श्री ईश्वर पुरी से मिलन
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श्लोक 12
श्लोक
1.11.12
দেখি’ বিশ্বম্ভর-রূপ সকল বৈষ্ণব
হরিষ-বিষাদ হৈ’ মনে ভাবে’ সব
देखि’ विश्वम्भर-रूप सकल वैष्णव
हरिष-विषाद है’ मने भावे’ सब
अनुवाद
विश्वम्भर के आकर्षक रूप को देखकर वैष्णवों को हर्ष और शोक दोनों का अनुभव हुआ।
Seeing the attractive form of Vishvambhara, the Vaishnavas felt both joy and sorrow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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