श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 11: श्री ईश्वर पुरी से मिलन  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  1.11.112 
পুনঃ হাসি’ বোলেন,—“তোমার দোষ নাই
অবশ্য বলিবা, দোষ থাকে যেই ঠাঞি”
पुनः हासि’ बोलेन,—“तोमार दोष नाइ
अवश्य बलिबा, दोष थाके येइ ठाञि”
 
 
अनुवाद
फिर वह मुस्कुराये और बोले, “आपकी कोई गलती नहीं होगी, लेकिन यदि पुस्तक में कोई त्रुटि हो तो आपको मुझे बताना होगा।”
 
Then he smiled and said, “You will not be at fault, but if there is any mistake in the book you will have to tell me.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)