श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 11: श्री ईश्वर पुरी से मिलन  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  1.11.110 
অতএব তোমার সে প্রেমের বর্ণন
ইহাতে দূষিবেক কোন্ সাহসিক জন?”
अतएव तोमार से प्रेमेर वर्णन
इहाते दूषिबेक कोन् साहसिक जन?”
 
 
अनुवाद
“अतः कृष्ण की लीलाओं के आपके भक्तिमय वर्णन में कौन दोष निकालने का साहस करेगा?”
 
“So who would dare to find fault with your devotional description of Krishna's pastimes?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)