श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  1.10.51 
হেন মতে দোঙ্হে চিনি’ দোঙ্হে ঘরে গেলা
কে বুঝিতে পারে গৌরসুন্দরের খেলা?
हेन मते दोङ्हे चिनि’ दोङ्हे घरे गेला
के बुझिते पारे गौरसुन्दरेर खेला?
 
 
अनुवाद
इस प्रकार एक-दूसरे को पहचानकर वे दोनों अपने-अपने घर लौट गए। भगवान गौरसुन्दर की लीला को कौन समझ सकता है?
 
Thus recognizing each other, they both returned to their homes. Who can understand the play of Lord Gaurasundara?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)