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श्लोक 1.10.51  |
হেন মতে দোঙ্হে চিনি’ দোঙ্হে ঘরে গেলা
কে বুঝিতে পারে গৌরসুন্দরের খেলা? |
हेन मते दोङ्हे चिनि’ दोङ्हे घरे गेला
के बुझिते पारे गौरसुन्दरेर खेला? |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार एक-दूसरे को पहचानकर वे दोनों अपने-अपने घर लौट गए। भगवान गौरसुन्दर की लीला को कौन समझ सकता है? |
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| Thus recognizing each other, they both returned to their homes. Who can understand the play of Lord Gaurasundara? |
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