श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.10.31 
সন্তোষে দিলেন তাঙ্’র অঙ্গে পদ্ম-হস্ত
মুরারির দেহ হৈল আনন্দ সমস্ত
सन्तोषे दिलेन ताङ्’र अङ्गे पद्म-हस्त
मुरारिर देह हैल आनन्द समस्त
 
 
अनुवाद
संतुष्ट होकर भगवान ने अपने करकमल से मुरारी के शरीर का स्पर्श किया और मुरारी आनंद से भर गए।
 
Being satisfied, God touched Murari's body with his lotus hand and Murari was filled with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)