श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.10.25 
প্রত্যুত্তর দিলা,—“কেনে বড ত’ ঠাকুর?
সবারেই চাল’ দেখি’ গর্বহ প্রচুর?
प्रत्युत्तर दिला,—“केने बड त’ ठाकुर?
सबारेइ चाल’ देखि’ गर्वह प्रचुर?
 
 
अनुवाद
उन्होंने उत्तर दिया, "प्रिय महोदय, आपको इतना घमंड क्यों है? आप सबको चुनौती क्यों देते हैं?"
 
He replied, "Dear Sir, why are you so proud? Why do you challenge everyone?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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