श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  1.10.128 
ঈশ্বরের ইচ্ছা বুঝিবার শক্তি কা’র?
কি-রূপে করেন কোন্ কালের বিহার?
ईश्वरेर इच्छा बुझिबार शक्ति का’र?
कि-रूपे करेन कोन् कालेर विहार?
 
 
अनुवाद
भगवान की परम इच्छा को कौन समझ सकता है? वे अपनी लीलाएँ कैसे और कब करते हैं?
 
Who can understand the ultimate will of the Lord? How and when does He perform His pastimes?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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