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श्लोक 1.10.127  |
এই-রূপ নানা-মত কথা আই কয
ব্যক্ত হৈযা ও প্রভু ব্যক্ত নাহি হয |
एइ-रूप नाना-मत कथा आइ कय
व्यक्त हैया ओ प्रभु व्यक्त नाहि हय |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार माता शची के मन में अनेक विचार आए, क्योंकि भगवान् लगभग स्वयं प्रकट हो गए थे, किन्तु पूर्णतः नहीं। |
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| Thus many thoughts came to the mind of Mother Shachi, because the Lord had almost revealed Himself, but not completely. |
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