श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  1.10.126 
এই লক্ষ্মী-বধূ গৃহে প্রবেশিলে
কোথা হৈতে না জানি আসিযা সব মিলে?”
एइ लक्ष्मी-वधू गृहे प्रवेशिले
कोथा हैते ना जानि आसिया सब मिले?”
 
 
अनुवाद
“वरना जब से यह बहू लक्ष्मी मेरे घर में आई है, तब से सब कुछ कहाँ से आ गया?”
 
“Otherwise, ever since this daughter-in-law Lakshmi came to my house, where did all this come from?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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