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श्लोक 4.9.39  |
तत्र हास्यापरसः —
पलायमानम् उद्वीक्ष्य चपलायत-लोचनम् ।
कृष्णम् आराज् जरासन्धः सोल्लुण्ठम् अहसीन् मुहुः ॥४.९.३९॥ |
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| अनुवाद |
| “कृष्ण को दूर से भागते हुए देखकर जरासंध बार-बार हंसने लगा।” |
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| “Jarasandha started laughing again and again after seeing Krishna running away from a distance.” |
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