श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 9: रसाभास (रसों की अधूरी अभिव्यंजना)  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  4.9.34 
तत्र हास्यानुरसः —
ताण्डवं व्यधित हन्त कक्खटी
मर्कटी भ्रू-कुटीभिस् तथोद्धुरम् ।
येन वल्लव-कदम्बकं बभौ
हास-डम्बर-करम्बिताननम् ॥४.९.३४॥
 
 
अनुवाद
हास्यानुरास का एक उदाहरण: "जब मादा बंदर कक्खति ने अपनी भौंहें हिलाईं और उग्र रूप से नृत्य किया, तो सभी ग्वाल-बाल जोर से हंस पड़े।"
 
An example of hasyanurasa: "When the female monkey Kakkhati moved her eyebrows and danced furiously, all the cowherd boys laughed loudly."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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