श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 9: रसाभास (रसों की अधूरी अभिव्यंजना)  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.9.30 
अथ धृष्टता —
प्रकट-प्रार्थनादिः स्यात् सम्भोगादेस् तु धृष्टता ॥४.९.३०॥
 
 
अनुवाद
दुस्साहस: "कृष्ण से खुलेआम आनंद की याचना करना दुस्साहस कहलाता है।"
 
Audacity: "To openly ask Krishna for pleasure is called audacity."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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