श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 9: रसाभास (रसों की अधूरी अभिव्यंजना)  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.9.28 
अथ ग्राम्यत्वम् —
बाल-शब्दाद्य्-उपन्यासो विरसोक्ति-प्रपञ्चनम् ।
कटी-कण्डूतिर् इत्य् आद्यं ग्राम्यत्वं कथितं बुधैः ॥४.९.२८॥
 
 
अनुवाद
अश्लीलता: "बाला (बच्चा) जैसे अनुपयुक्त शब्दों का प्रयोग करना, अप्रिय भाषा का प्रयोग करना और नितंबों को खुजलाना बुद्धिमान लोगों द्वारा अश्लीलता कहा जाता है।"
 
Obscenity: "Using inappropriate words like bala (child), using offensive language and scratching the buttocks are called obscenity by intelligent people."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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