श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 9: रसाभास (रसों की अधूरी अभिव्यंजना)  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.9.26 
तत्र समय-व्यतिक्रान्तिः —
समयाः खण्डितादीनां प्रिये रोषोदितादयः ।
पुंसः स्मितादयश् चात्र प्रियया ताडनादिषु ।
एतेषाम् अन्यथा-भावः समयानां व्यतिक्रमः ॥४.९.२६॥
 
 
अनुवाद
"अपने प्रेमी द्वारा उपेक्षित स्त्री के लिए उचित आचरण क्रोध प्रदर्शित करना है। अपने प्रेमी द्वारा फेंके गए फूलों से आहत पुरुष के लिए उचित आचरण मुस्कुराना है। पुरुष और स्त्री द्वारा इसके विपरीत व्यवहार करना सामान्य आचरण का उल्लंघन कहलाता है।"
 
"The proper behavior for a woman neglected by her lover is to show anger. The proper behavior for a man hurt by the flowers thrown by his lover is to smile. The opposite behavior by both men and women is considered a violation of normal conduct."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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