शुचित्वौज्ज्वल्य-वैदिग्ध्यात् सुवेशत्वाच् च कथ्यते ।
शृङ्गारस्य विभावत्वम् अन्यत्राभासता ततः ॥४.९.२४॥
अनुवाद
"कहा जाता है कि मधुर-रस के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ शुद्धता, उपयुक्त रूप और प्रजाति, प्रेम में चतुराई और अच्छे परिधान से उत्पन्न होती हैं। आलंबन में इन गुणों का अभाव मधुर-रस के विभाव में आभास उत्पन्न करता है।"
"It is said that the conditions suitable for madhura-rasa are produced by purity, appropriate form and species, cleverness in love, and good attire. The absence of these qualities in the ālambāna produces the appearance of madhura-rasa in the vibhāva."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥