श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 9: रसाभास (रसों की अधूरी अभिव्यंजना)  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.9.22 
वृद्धा, यथा —
कज्जलेन कृत-केश-कालिमा
बिल्व-युग्म-रचितोन्नत-स्तनी ।
पश्य गौरि किरती दृग्-अञ्चलं
स्मेरयत्य् अघहरं जरत्य् असौ ॥४.९.२२॥
 
 
अनुवाद
वृद्धाएँ: "देखो राधा! इस वृद्धा ने कज्जल से अपने बाल काले कर लिए हैं और चोली में बिल्वपत्र डालकर अपने वक्षस्थल ऊँचे कर लिए हैं। वह कृष्ण की ओर प्रेम भरी दृष्टि डालते हुए उन्हें मुस्कुराने पर मजबूर कर रही है।"
 
Old women: "Look Radha! This old woman has blackened her hair with kajal and has raised her breasts by putting bilva leaves in her blouse. She is looking lovingly at Krishna and forcing him to smile."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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